चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CEC टीम का मुरैना दौरा 11 मई को पेश होगी रिपोर्ट

 चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CEC टीम का मुरैना दौरा 11 मई को पेश होगी रिपोर्ट


मुरैना |चंबल नदी की तलहटी में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत खनन के मुद्दे पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। इसी कड़ी में उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) की टीम ने शुक्रवार को मुरैना पहुंचकर चंबल नदी के विभिन्न रेतघाटों का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के प्रशासनिक, पुलिस और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।यह निरीक्षण न केवल अवैध खनन की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए था, बल्कि भविष्य में इसे रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।

मोटर बोट से किया गया निरीक्षण

CEC कमेटी के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल के नेतृत्व में टीम ने चंबल नदी के राजघाट क्षेत्र का दौरा किया। यहां से टीम मोटर बोट के माध्यम से नदी के दोनों किनारों का अवलोकन करने निकली। निरीक्षण के दौरान टीम ने उन स्थानों का जायजा लिया, जहां अवैध रूप से रेत खनन और उसका परिवहन किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नदी की तलहटी, बीहड़ों और किनारों पर रेत के जमाव और गतिविधियों को बारीकी से देखा गया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद स्थानीय प्रशासन से खनन की स्थिति, कार्रवाई और चुनौतियों को लेकर विस्तृत जानकारी भी ली।

तीन राज्यों की संयुक्त बैठक

निरीक्षण के बाद देवरी स्थित घड़ियाल अभ्यारण केंद्र में मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली, जिसमें अवैध खनन रोकने के उपायों पर गहन चर्चा हुई। बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि चंबल क्षेत्र में खनन माफिया की गतिविधियों को रोकना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यह इलाका तीन राज्यों की सीमाओं से जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कार्रवाई तेज

दरअसल, हाल ही में एक वनरक्षक को अवैध रेत परिवहन कर रहे वाहन चालक द्वारा कुचल दिए जाने की घटना ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया था। इस घटना को मीडिया के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान में लिया और सख्त निर्देश जारी किए। इसके बाद चंबल नदी क्षेत्र में अवैध खनन और परिवहन को रोकने के लिए सशस्त्र बलों की तैनाती कर दी गई है। कई स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की जा रही है।

11 मई को होगी अहम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख निर्धारित की है। इससे पहले CEC कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में पेश करेगी। इस रिपोर्ट में निरीक्षण के दौरान पाए गए तथ्यों, खनन की वास्तविक स्थिति, प्रशासनिक कार्रवाई और आगे के सुझाव शामिल होंगे। इसके आधार पर न्यायालय आगामी दिशा-निर्देश जारी करेगा।

जमीनी हकीकत और चुनौतियां

हालांकि जिला वन विभाग के अधिकारी यह दावा कर रहे हैं कि चंबल नदी घाट से अवैध रेत खनन पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर रेत के परिवहन में लगे वाहनों की गतिविधियां सामने आईं। अधिकारियों का कहना है कि यह रेत पहले से बीहड़ों में एकत्रित की गई हो सकती है, जिसे अब धीरे-धीरे बाहर निकाला जा रहा है। ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा रेत के अवैध भंडारण को नष्ट करने की कार्रवाई की जा रही है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा

चंबल नदी केवल रेत का स्रोत ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र भी है। यह क्षेत्र घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है। अवैध खनन से नदी की धारा, किनारों की संरचना और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहा है।

सख्ती के बावजूद जारी चुनौतियां

प्रशासन द्वारा सख्ती बढ़ाने और बल तैनात करने के बावजूद खनन माफिया नए तरीके अपनाकर गतिविधियों को जारी रखने की कोशिश कर रहा है। नहरों और मुख्य मार्गों की बजाय अब ग्रामीण रास्तों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निगरानी करना और भी मुश्किल हो जाता है।

आगे की राह

CEC कमेटी का यह दौरा आने वाले समय में महत्वपूर्ण निर्णयों की आधारशिला साबित हो सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कड़े निर्देश जारी किए जाते हैं, तो चंबल क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए जरूरी है कि तीनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो, तकनीकी निगरानी बढ़ाई जाए और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जाएं।


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