सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बाद भी नहीं थम रही रेत तस्करी टास्कफोर्स की कार्रवाई बेअसर, हाईवे पर दौड़ रहे रेत से भरे वाहन
सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बाद भी नहीं थम रही रेत तस्करी टास्कफोर्स की कार्रवाई बेअसर, हाईवे पर दौड़ रहे रेत से भरे वाहन
मुरैना : राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य में उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंध के बावजूद अवैध रेत खनन और परिवहन का खेल लगातार जारी है। टास्कफोर्स, वन विभाग और सशस्त्र बल की कार्रवाई के बाद भी खनन माफिया बेखौफ होकर चम्बल नदी से रेत निकालकर खुलेआम परिवहन कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि गांवों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग तक रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली दिनदहाड़े दौड़ते दिखाई दे रहे हैं। अब इस पूरे मामले में ग्रामीण भी सक्रिय हो गए हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस व प्रशासन तक अवैध खनन की सूचनाएं पहुंचा रहे हैं।
चम्बल नदी में अवैध खनन को रोकने के लिए उच्चतम न्यायालय ने पहले ही सख्त निर्देश जारी कर रखे हैं। इसके बाद भी मुरैना जिले के कई घाटों पर लगातार रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। टास्कफोर्स द्वारा सशस्त्र बल की मदद से कार्रवाई की जा रही है, लेकिन खनन माफियाओं पर उसका ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा। अवैध खनन करने वाले लोग अब नए-नए तरीके अपनाकर रेत का परिवहन कर रहे हैं।
बरवासिन घाट पर रेत का बड़ा भंडारण
मुरैना जिले के बरवासिन घाट पर अवैध खनन करने वाले बाहुबलियों द्वारा हजारों ट्रॉली रेत का भंडारण किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेत चम्बल नदी से अवैध रूप से खनन कर जमा की गई है। इसी भंडारित रेत को बाद में ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक लंबे समय से इस इलाके में अवैध खनन का कारोबार चल रहा है। रात के अंधेरे से लेकर दिनदहाड़े तक रेत से भरे वाहन घाटों से निकलते देखे जा सकते हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई सीमित नजर आती है।
कैमारा गांव के युवाओं ने रोका ट्रैक्टर
हाल ही में कैमारा गांव में ग्रामीण युवाओं ने साहस दिखाते हुए अवैध रेत से भरे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को गांव के बीच रोक लिया। युवाओं ने चालक को वाहन वापस ले जाने के लिए मजबूर कर दिया। पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई।
वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध और प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अवैध खनन का कारोबार लगातार जारी है। वीडियो में ट्रैक्टर अत्यधिक ओवरलोड दिखाई दे रहा है और वजन अधिक होने के कारण वह दो पहियों पर चलता नजर आ रहा है। इससे सड़क हादसे की आशंका भी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन पूरी तरह से कार्रवाई नहीं कर पा रहा है तो स्थानीय लोग खुद अवैध खनन रोकने के लिए आगे आएंगे। गांव के लोगों द्वारा उठाया गया यह कदम अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
वायरल वीडियो के बाद प्रशासन सक्रिय
रेत से भरे वाहनों के वीडियो वायरल होने के बाद राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाले वाहन और चालक की पहचान की जा रही है तथा संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां भी शिकायतें मिल रही हैं वहां कार्रवाई की जा रही है।
नावों के जरिए हो रही रेत तस्करी
टास्कफोर्स की सख्ती बढ़ने के बाद अब रेत तस्करों ने नया तरीका अपना लिया है। जानकारी के अनुसार राजस्थान की ओर से नावों के जरिए चम्बल नदी पार कर मध्यप्रदेश में रेत पहुंचाई जा रही है। नदी के रास्ते रेत परिवहन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद टास्कफोर्स हरकत में आई।
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभ्यारण्य की टीम ने गुनापुरा, होराबारा और बीलगढ़ा घाट पर दबिश देकर कार्रवाई की। इस दौरान चार नावों को जब्त किया गया। साथ ही नदी तक जाने वाले रास्तों को भी अवरुद्ध कर दिया गया ताकि अवैध परिवहन रोका जा सके।
350 ट्रॉली रेत नष्ट
टास्कफोर्स द्वारा कार्रवाई करते हुए भंडारित 350 से अधिक ट्रॉली रेत को नष्ट किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई खनन माफियाओं को सख्त संदेश देने के लिए की गई है। हालांकि इसके बावजूद अवैध खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के कुछ समय बाद ही फिर से रेत परिवहन शुरू हो जाता है। यही कारण है कि खनन माफियाओं में प्रशासन का डर दिखाई नहीं देता।
हाईवे पर खुलेआम दौड़ रहे रेत से भरे वाहन
राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली खुलेआम फर्राटे भरते नजर आए। ये वाहन चम्बल नदी के घाटों से रेत भरकर ग्वालियर जिले की ओर जाते दिखाई दिए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि वन चौकी के सामने से भी ये वाहन बेखौफ गुजरते रहे।
राहगीरों द्वारा इन वाहनों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने के बाद वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जब हाईवे पर खुलेआम रेत से भरे वाहन दौड़ रहे हैं तो कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है।
जलीय जीवों पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि चम्बल नदी में लगातार हो रहा अवैध खनन घड़ियाल, डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। रेत खनन से नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है, जिससे जैव विविधता पर असर पड़ रहा है।
ऐसे में ग्रामीणों द्वारा अवैध खनन के खिलाफ सामने आना पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और टास्कफोर्स आने वाले दिनों में अवैध खनन पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाते हैं।

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