ओलावृष्टि और तेज आंधी से बड़ा हादसा: निर्माणाधीन दीवार गिरी, आधा दर्जन बच्चे घायल
ओलावृष्टि और तेज आंधी से बड़ा हादसा: निर्माणाधीन दीवार गिरी, आधा दर्जन बच्चे घायल
मुरैना | मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में गुरुवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली और तेज आंधी, बारिश तथा ओलावृष्टि ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। इसी दौरान सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत लोरी का पुरा टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें एक निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरने से करीब आधा दर्जन बच्चे घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य चलाया।
अचानक बदला मौसम, बना हादसे की वजह
जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच मौसम अचानक खराब हो गया। तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और ओलावृष्टि शुरू हो गई। तेज हवाओं की रफ्तार इतनी अधिक थी कि कई स्थानों पर पेड़ और कमजोर निर्माण प्रभावित हुए। इसी दौरान लोरी का पुरा इलाके में स्थित एक निर्माणाधीन मकान की दीवार तेज हवा और बारिश के दबाव को सहन नहीं कर सकी और भरभराकर गिर गई। यह निर्माणाधीन मकान ग्रामीण महेंद्र सिंह का बताया जा रहा है, जिसकी दीवार अचानक पास में स्थित गजेंद्र सिंह जाटव के मकान पर जा गिरी। हादसे के वक्त आसपास बच्चे मौजूद थे, जो अचानक गिरी दीवार के मलबे की चपेट में आ गए।
मलबे में दबे बच्चे, मची चीख-पुकार
दीवार गिरते ही जोरदार आवाज हुई और आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर दौड़ पड़े। देखते ही देखते घटनास्थल पर भीड़ जमा हो गई। मलबे में दबे बच्चों को निकालने के लिए ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर ईंट-पत्थर हटाकर बच्चों को बाहर निकाला। इस दौरान कई लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास किया। करीब आधा दर्जन बच्चे इस हादसे में घायल हुए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें भी आईं।
घायलों को तुरंत पहुंचाया गया अस्पताल
राहत कार्य के बाद सभी घायल बच्चों को तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने निजी वाहनों और अन्य साधनों की मदद से बच्चों को अस्पताल तक पहुंचाया। जिला अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत सभी घायलों का प्राथमिक उपचार शुरू किया। बाद में सभी बच्चों को भर्ती कर लिया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि उन्हें निगरानी में रखा गया है।
घायल बच्चों की पहचान
इस हादसे में घायल बच्चों की पहचान भोला, खुशबू, करुआ, नैंसी, नव्या और अंजलि के रूप में हुई है। सभी बच्चे स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं और घटना के समय आसपास ही खेल रहे थे।
निर्माणाधीन दीवार बनी हादसे की वजह
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस मकान की दीवार गिरी वह निर्माणाधीन थी और संभवतः पूरी तरह मजबूत नहीं थी। तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण दीवार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे वह अचानक गिर गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया होता, तो इस तरह का हादसा टाला जा सकता था। वहीं कुछ लोगों ने प्रशासन से निर्माणाधीन भवनों की सुरक्षा जांच कराने की मांग भी की है।
ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
इस घटना में सबसे अहम भूमिका ग्रामीणों की तत्परता ने निभाई। अगर समय रहते राहत कार्य शुरू नहीं किया जाता, तो हादसा और गंभीर हो सकता था। ग्रामीणों ने बिना किसी संसाधन के तत्काल मलबा हटाकर बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। स्थानीय लोगों की इस सूझबूझ और साहस की हर तरफ सराहना की जा रही है।
प्रशासन की नजर, आगे की कार्रवाई संभव
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हुआ। मामले पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर जांच कर कार्रवाई की बात कही जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि प्रशासन निर्माणाधीन भवनों की स्थिति की समीक्षा कर सकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
मौसम विभाग की चेतावनी का असर
मौसम विभाग पहले ही प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी कर चुका था। मुरैना समेत आसपास के क्षेत्रों में इसका असर साफ देखा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मौसम में कच्चे और निर्माणाधीन ढांचों के पास रहने या खेलने से बचना चाहिए, क्योंकि तेज हवाएं कमजोर संरचनाओं को गिरा सकती हैं।
सतर्कता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि मौसम खराब होने की स्थिति में अतिरिक्त सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। खासतौर पर बच्चों को खुले स्थानों और निर्माणाधीन भवनों से दूर रखना चाहिए।

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